Saturday, 26 November 2016

शायरी और ग़ज़ल की दुनिया के चमकते सितारे मुनव्वर राना जी को वाणी प्रकाशन की ओर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!



शायरी और ग़ज़ल की दुनिया के चमकते सितारे

मुनव्वर राना जी 

को वाणी प्रकाशन की ओर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ! 



"जागते रहना ही अब अपना मुक़द्दर है..." 

अलग मज़हब के थे लेकिन दुखों में साथ रहते थे 
हम ऐसी दोस्ती का रंग कच्चा छोड़ आए हैं...

गले मिलती थीं आपस में जहाँ पर मुख्तलिफ़ क़ौमें
वहाँ का किसलिए हम आबो-दाना छोड़ आए हैं...

हमें इस ज़िन्दगी पर इसलिए भी शर्म आती है 
कि हम मरते हुए लोगों को तन्हा छोड़ आए हैं...

हमेशा जागते रहना ही अब अपना मुक़द्दर है

हम अपने घर में सब लोगों को सोता छोड़ आए हैं...

Saturday, 12 November 2016

Marathi Literature Festival (11-13 नवम्बर) में वाणी प्रकाशन की शिरकत


Marathi Literature Festival (11-13 नवम्बर) में

  वाणी प्रकाशन की शिरकत


नासिक के कुसुमाग्रज स्मारक का तीन दिवसीय साहित्योत्सव किसी प्रचलित 'लिट्फेस्ट' जैसा न होकर ज्ञान और कला की कई दुनिया का एक समन्वय है। 'स्वतन्त्र विचार' की थीम वाले इस आयोजन में विख्यात लेखक, कवि और कलाकारों के अलावा फिल्मकार, कार्टूनिस्ट, नाट्यकर्मी, सम्पादक, पत्रकार, प्रकाशक और समाज-राजनीति से जुड़ी नामचीन हस्तियाँ भी शिरकत कर रही हैं। इस आयोजन में Dainik Bhaskar समूह के Divya Marathi के साथVani Prakashan मुख्य सहयोगी है।


एम.एल.एफ.में वाणी प्रकाशन से जुड़े लेखकों में शामिल हो रहे हैं


General V.K. Singh जिनकी आत्मकथा 'साहस और संकल्प' उनके सैन्य जीवन की रोमांचक दास्तान तो है ही, भारत के एक जागरूक नागरिक की ओर से पेश किया गया एक ईमानदार और प्रामाणिक दस्तावेज़ भी है। 'साहस और संकल्प' आप इस लिंक पर देखे सकते हैं :



Sharankumar Limbale जिन्होंने न केवल मराठी साहित्य का बल्कि समूचे भारतीय दलित साहित्य के वैचारिक और सृजनात्मक क्षितिज का विस्तार करते हुए एक प्रतिमान स्थापित किया है। 'अक्करमाशी' और 'दलित साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र' जैसी पुस्तकें इसका प्रमाण हैं। लिम्बाले जी की पुस्तकों को इस लिंक पर देखें :http://www.vaniprakashan.in/lpage.php…


Laxmi Prasad Pant जिन्होंने 'हिमालय का कब्रिस्तान' लिखकर हिमालय को देखने के अब तक के नज़रिए को बदल कर रख दिया है। कुदरत के कहर का विश्लेषण करते हुए उन्होंने आस्था और विश्वास जैसे मूल्यों की भी गहरी छानबीन की है। इस पुस्तक के बारे में यहाँ से जानें :

वाणी प्रकाशन की ओर से एम.एल.एफ. की सफलता के लिए शुभकामनाएँ 
और सम्मानित लेखकों के बधाई !



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में 

तस्वीरों के बहाने कुछ झलकियाँ !
General V.K. Singh से Laxmi Prasad Pant की बातचीत


श्रोताओं से अपने अनुभव साझा करते हुए General V.K. Singh

वाणी प्रकाशन से प्रकाशित Laxmi Prasad Pant की पुस्तक "हिमालय का क़ब्रिस्तान" 
का विमोचन करते हुए जनरल वी.के.सिंह, वाणी प्रकशन के प्रबंध निदेशक अरुण महेश्वरी और अन्य अतिथिगण।

बातचीत की मुद्रा में जनरल वी के सिंह

'मराठी लिटरेचर फेस्टिवल' की पूरी जानकारी 
आप इस लिंक पर जाकर ले सकते हैं
 http://marathiliteraturefestival.com/

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#VaniPrakashan #वाणीप्रकाशन #MarathiLiteratureFestival
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Thursday, 10 November 2016

Book Launch : Lata Sur-Gatha by Yatindra Mishra



 ऑक्सफोर्ड बुक स्टोर में एक सुरमई शाम की कुछ गवाहियाँ... 

यतीन्द्र मिश्र की पुस्तक 'लता सुर-गाथापर आयोजित परिचर्चा की कुछ तस्वीरें:

पुस्तक का विमोचन करते हुए 
 विद्या  शाह , यतीन्द्र मिश्र , मनीष पुष्कले और अदिति  माहेश्वरी-गोयल 



लता जी में एक दुर्लभ फोटोग्राफिक मेमोरी है 
इसलिए जब उनसे बातचीत का सिलसिला चल निकला
 तो उनकी सांगीतिक ज़िन्दगी की परत-दर-परत खुलती चली गयी..- यतीन्द्र मिश्र




महान कला और कलाकारों में हमेशा एक सादृश्य होता है 
और यतीन्द्र जी की यह किताब इस खूबी को बखूबी उजागर करती है...- विद्या शाह


'लता : सुर-गाथा' पुस्तक के कलात्मक पहलू में एक 'नोस्टेल्जिक एलिमेंट' है...- मनीष पुष्कले


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लता सुर-गाथा 
आई.एस.बी.एन: 978-93-5072-841-3
आई.एस.बी.एन: 978-93-5072-842-0
 विषय:  संगीत/सिनेमा/कला 
 संस्करण:  प्रथम 
वर्ष: 2016
 मूल्य: 1495/-(हार्ड कवर  पेपर बॅक - 695/-
 पृष्ठ संख्या: 640 


 पुस्तक अंश  

उनकी आवाज़ से चेहरे बनते हैं। ढेरों चेहरे,जो अपनी पहचान को किसी रंग-रूप या नैन नक्शे से नहीं, बल्कि सुर और रागिनी के आइनें में देखने से आकार पाते हैं। एक ऐसी सलोनी निर्मिती, जिसमें सुर का चेहरा दरअसल भावनाओं का चेहरा बन जाता है। कुछ-कुछ उस तरह,जैसे बचपन में पारियों की कहानियों में मिलने वाली एक रानी परी की उदारता और प्रेम से भीगा हुआ व्यक्तित्व हमको सपनों में भी खुशियों और खिलोंनों से भर देता था। बचपन में रेडियों या ग्रामोफोन पर सुनते हुए किसी प्रणय-गीत या नृत्य की झंकार में हमें कभी यह महसूस ही नहीं हुआ कि इस बक्से के भीतर कुछ निराले द्रंग से मधुबाला या वहीदा रहमान पियानो और सितार कि धुन पर थिरक रही हैं, बल्कि वह एक सीधी-सादी महिला कि आवाज़ कम झीना-सा पर्दा ज्यादा है, जिस पर फूलों का हर सिंगार, पंखुरियों का रंग और धरती पर चंद्रमा कि टूटकर गिरी हुई किरणों का झिलमिलाहट पसरी हुई है।


यतीन्द्र मिश्र

यतीन्द्र मिश्र हिन्दी कवि, सम्पादक और संगीत अध्येता हैं। उनके अब तक तीन कविता-संग्रह, शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी, नृत्यांगना सोनल मानसिंह एवं शहनाई उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ पर हिन्दी में प्रामाणिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। प्रदर्शनकारी कलाओं पर निबन्धों की एक किताब विस्मय का बखानतथा कन्नड़ शैव कवयित्री अक्क महादेवी के वचनों का हिन्दी में पुनर्लेखन भैरवीनाम से प्रकाशित हुआ है। वरिष्ठ कवि कुँवरनारायण पर एकाग्र तीन पुस्तकों क्रमशः कुँवरनारायण - संसारएवं उपस्थिति’, ‘कई समयों मेंएवं दिशाओं का खुला आकाश’, अशोक वाजपेयी के गद्य का एक संचयन किस भूगोल में किस सपने मेंतथा अज्ञेय काव्य से एक चयन जितना तुम्हारा सच हैप्रकाशित हैं। साथ ही, फ़िल्म निर्देशक एवं गीतकार गुलज़ार की कविताओं एवं गीतों के चयन क्रमशः यार जुलाहेतथा मीलों से दिननाम से सम्पादित हैं। गिरिजाका अंग्रेजी, ‘यार जुलाहेका उर्दू तथा अयोध्या शृंखला कविताओं का जर्मन अनुवाद प्रकाशित हुआ है। उन्हें रज़ा पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद युवा पुरस्कार, हेमन्त स्मृति कविता सम्मान सहित भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की कनिष्ठ शोधवृत्ति एवं सराय, नयी दिल्ली की स्वतंत्र शोधवृत्ति मिली हैं। साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों हेतु भारत के प्रमुख नगरों समेत अमेरिका, इंग्लैण्ड, मॉरीशस एवं आबु धाबी की यात्राएँ की हैं। अयोध्या में रहते हैं तथा समन्वय व सौहार्द के लिए विमला देवी फाउण्डेशन न्यास के माध्यम से सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करते हैं।

'लता सुर-गाथा' के लिए इस लिंक पर क्लिक करें -
http://www.vaniprakashan.in/lpage.php?word=LATA+%3A+SUR+GATHA

   पुस्तकें यहाँ भी उपलब्ध है